हास्य कवि सम्मेलन बुक करने के लिए संपर्क करें शिव इलाहाबादी मोबाइल 73983 28084
Saturday, March 25, 2023
Hasya Kavi sammelan booking organizers and service providers in India.
Saturday, March 4, 2023
Tuesday, October 4, 2022
हास्य कवि सम्मेलन बुकिंग कैसे करें ? How to book Hasya Kavi Sammelan Show? कवि सम्मेलन बुकिंग कांटेक्ट नंबर || कवि सम्मेलन ऑर्गेनाइजर उत्तर प्रदेश भारत || #hasya #kavi #sammelan #organisers #organizers and #booking #contact #address in #india
🌹🌹कवि गौरव चौहान 'ओज कवि' 🌹🌹
पूरे देश में अपने ओजस्वी तेवर के लिए जाने जाने वाले ओज के प्रख्यात कवि गौरव चौहान आज किसी के परिचय के मोहताज नहीं है ज़ी न्यूज़ न्यूज़ एटिन इंडिया जैसे विभिन्न समाचार चैनलों के माध्यम से अपनी प्रस्तुति देने वाले कवि गौरव चौहान देश ही नहीं अपितु पूरे विश्व मे अपनी कविताओं के लिए जाने जाते हैं |
🌴🌴कवि देवेंद्र प्रताप सिंह आग 'ओज कवि'🌴🌴
***कवियत्रियों की सूची ***
Monday, June 14, 2021
कंटक राह मे बहुत मिलेंगे, मगर धैर्य से चलना होगा। मोटिवेशन की कविता / Motivational Poem/ Motivation ki kavita //
कंटक राह मे बहुत मिलेंगे,
मगर
धैर्य से चलना होगा।
राहे बड़ी अंधेरी होंगी,
खुद
ही दीप सा जलना होगा ।
पथ पर चलते एकाकी तुम,
थका-2
महसूस करोगे,
मगर सूर्य बन नई सुबह मे,
फिर से तुम्हें निकलना होगा।
घना अंधेरा छट जाएगा,
कोहरा
भी घनघोर मिटेगा।
सफर करोगे शुरू अकेले,
तभी
कारवां खून जुटेगा।
ऐसे जीवन पथ पर बढ़ते,
कदम-2
फिर चलना होगा,
राहे बड़ी अंधेरी होंगी,
खुद
ही दीप सा जलना होगा ।
जीवन के वीराने पथ पर,
परछाई भी साथ न देगी,
बची-खुची दिल की अभिलाषा,
परेशानियों से बिखरेगी।
कटी पतंग सा होगा जीवन,
पर
हर बार संभलना होगा।
राहें बड़ी अंधेरी होगी,
खुद
ही दीप सा जलना होगा।
कवि शिव इलाहाबादी
'यश'
कवि एवं लेखक
मो.- 7398328084
©All Rights
Reserved@kavishivallahabadi
ब्लॉग-www.kavishivallahabadi.blogspot.com
सब अभिलाषायें सुलगी सी पनघट हैं प्यासे-2 से// prem ki ek kavita // Mohabbat ke geet // Dil chhu lene wale geet // hindi kavita //
सब अभिलाषायें
सुलगी सी पनघट हैं प्यासे-2 से,
सुध-बुध खोती
तरुणाई है,मन
मोर मगन मुसकाते से।
तुम इन आँखों को
पढ़-2 कर मदमस्त जवानी लिख देना,
मन प्रणय अगन मे
व्याकुल है तुम प्रेम कहानी लिख देना।
सोंधी-2 महकी-2
मन की फुलवारी लगती है,
चंदा की शीतल सी
छाया बन दिल मे अगन सुलगती है।
हर रोज मचलती
पुरवाई को विरह निशानी लिख देना।
मन प्रणय अगन मे
व्याकुल है तुम प्रेम कहानी लिख देना।
प्यासे-2 सावन
भादों,आँखों
से रोज छलकते हैं,
अंगूरी उन्मादक
चितवन से दिल हर रोज महकते हैं।
तुम प्रेम का
पढ़के उपन्यास एक तड़प वीरानी लिख देना,
मन प्रणय अगन मे
व्याकुल है तुम प्रेम कहानी लिख देना।
कवि शिव इलाहाबादी
'यश'
कवि एवं लेखक
मो.- 7398328084
©All Rights
Reserved@kavishivallahabadi
ब्लॉग-www.kavishivallahabadi.blogspot.com
Sunday, April 25, 2021
उलझ गई सी है ये जिंदगी हमारी है
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